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शिक्षा और अनुभव

शिक्षा और अनुभव उस शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़ेगा

फिर एक दिन हम Problems के लिए नहीं बल्कि Solutions के लिए जाने जायेंगे....

मित्रों हम जब जब भी जिस चीज के पीछे भागेंगे, वह चीज हमारे हाथ नहीं आएगी :-

1) हम जितना Problems से भागेंगे, Problems उतना ही हमारा पीछा करेगी.
सार :-  कई बार हमारे सामने कोई समस्या आती है तो हम ये कहते है की भगवन ये problem आपने हमें क्योँ दी. यहाँ सोचने वाली बात ये है कि वो problem किसी न किसी के सामने तो आएगी ही आएगी. धन्यवाद दें उस ईश्वर का कि ये problem हमारे सामने आई और हम अपनों के लिए ढाल बनकर खड़े हो गए. भागना नहीं है हमें अपनी problems से, उसका सामना करना है और हमारे पास इसके अलावा चारा भी क्या है और अब जब उस problem का सामना ही करना है तो Positive नजरिये (Attitude) के साथ किया जाये, जिससे एक दिन ऐसा हो कि लोग हमें Problems के लिए नहीं बल्कि Solutions के लिए जाने. (This is called GOODWILL). 

2)  हम पैसे के पीछे भागेंगे, तो पैसा हमारे हाथ नहीं आएगा।
सार :- हम काम के पीछे भाग कर अपना Knowledge और Experience बढ़ाएंगे, तो पैसा झक मार कर हमारे पीछे भागेगा। पैसे के अभाव में सिर्फ 1% लोग दूखी है, पर समझ के अभाव में 99% लोग दूखी है।

3)  हम किसी से प्यार मांगेंगे, तो वहां से यकीन मानिये हमें प्यार नहीं मिलेगा।
सार :- हम हर किसी का ख्याल रखेंगे तो लोग अपने आप हमसे प्यार करेंगे।

4) हम पढ़ाई और ट्रेनिंग को मुश्किल समझेंगे तो पढ़ाई हमारा जिंदगी भर पीछा नहीं छोड़ेगी।
सार :- इस चीज को सोचिये कि पढ़ाई हमको difficult क्योँ लगती है. मैं आपको अपना experience बताता हूँ :- जब मैं Professional Course कर रहा था तो Maths में मुझे बहुत Problem आ रही थी. Reason साफ़ था कि स्कूल से ही Maths में मेरे Basics बहुत weak थे. मैंने Professional Course करते हुए स्कूल के टीचर (Important है कि स्कूल टीचर से Basics strong की, न की Professional Teacher से ) से सबसे पहले अपने Maths के Basics strong किये और तब अपना Professional course बहुत अच्छी तरह से Complete किया। मित्रों हमें जिंदगी भर अपने रास्ते अपने हिसाब से Design करने हैं न की अपने पड़ोसी या अपने दोस्त या अपने रिस्तेदार के Experience के हिसाब से. दूसरों का Experience सुनना पूरा है पर उसके बाद दिमाग अपना चलाना है. दूसरे की "Trap of Thinking" में नहीं फंसना।         

मित्रों हम इस बात पर जिंदगी में बिलकुल ध्यान न दे की दुनिया हमारे बारे में क्या सोच, समझ रही है. रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है, लेकिन यदि अच्छे जूते के अंदर एक भी कंकड़ हो तो एक अच्छी सड़क पर भी कुछ कदम चलना मुश्किल है ।
यानी -
"बाहर की चुनोतियों से नहीं हम अपनी अंदर की कमजोरियों से हारते हैं "
सार :- मित्रों आज के समय में हम सबको पता होता है की हम किस वजह से दूसरों से पीछे हैं पर बस हम आलस्य और कारण पता होने के बावजूद उन चीजों को नहीं करते और Blame game में पड़ जाते हैं. मित्रों जैसे ही हम अपने Failure का ठिकरा दूसरों पर फोड़ते है तो समझ जाइये हमने अपनी Progress के रास्ते में रुकावट डालना शुरू कर दिया है. "Don't Blame Others for your failure."

सोच के देखिये कौन जिम्मेदार है हमारी failure का, थोड़ा ध्यान करते हैं :-
जितना बडा प्लाट होता है उतना बडा बंगला नही होता,
जितना बडा बंगला होता है उतना बडा दरवाजा नही होता,
जितना बडा दरवाजा होता है उतना बडा ताला नही होता,
जितना बडा ताला होता है उतनी बडी चाबी नही होती,
परन्तु चाबी पर पुरे बंगले का आधार होता है।
इसी तरह हमारे जीवन में बंधन और मुक्ति का आधार "हमारे अपने मन" की चाबी पर ही निर्भर होता है।

हम सबकुछ करें पर किसी को परेशान न करें, हम सबके बारे में हमेशा अच्छा सोचें, इसी में हमारी जीत है.

किसी ज्ञानी ने बिलकुल सही कहा है :-

अशिक्षा और अज्ञानता हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है,
पर
शिक्षा (Education) और अनुभव (Experience) उस शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़ेगा।